जब ट्रेन किस स्टेशन में इन करती है तो ट्रेन के जीतने एक्सेल होते हैं या पहिए होते हैं उन्हें काउंट किया जाता है और ट्रेन जब स्टेशन के बाहर चली जाती है तो उस टाइम भी उस ट्रेन के पूरे पहिए को काउंट किया जाता है अगर दोनों कंडीशन में पहिए समान मिलते हैं या एक्सल उनका सेम होता है तो स्टेशन मास्टर को एक सिग्नल मिलती है.
जिससे पता चलता है कि जितनी ट्रेन के एक्सल या पहिया है उतने पूरे के पूरे आउट हो गए हैं इस बात का पता लगाने के लिए एक्सेल काउंटर को ट्रैक के नीचे लगाया जाता है जो कि उसके एक एक पहिए को काउंट करते हैं. जो एक्सेल काउंटर होते हैं इनका फीडबैक देने के लिए यहां पर इस बॉक्स के अंदर एक मशीन या डिवाइस लगा होता है.
जिससे कि पता चलता है कि सिग्नल है या फिर जितने रनिंग कर रही हैं वह पूरे आउट हुए हैं कि नहीं यहां पर आप इसको देख सकते हैं अगर हम इस बॉक्स को ओपन करें तो आप यहां पर देख सकते हैं कि इसके अंदर डिवाइस लगा बहुत सारे मशीन होते हैं और यहां पर दो एलईडी जल रही है एक ग्रीन और एक रेड ग्रीन का मतलब होता है
क्लियर मतलब कि जितने ट्रेनें इनकी उतने पूरे के पूरे आउट हो जाते हैं तो यहां पर ग्रीन लाइट मिलता है जिससे पता चलता है कि यह रोलर पूरी तरह से क्लियर है रेड लाइट जलने का मतलब होता है कि ट्रेन के जितने एक्सेल इन हुए उतने पूरे के पूरे आउट नहीं हुए.




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