"कान्हा"
हजारों रात का जागा हूँ अब सोना चाहता हूँ
तुझे मिलके मैं ये पलकें भिगोना चाहता हूँ
बहुत ढूंढा है तुझे खुद में इतना थक गया हूँ
कि खुद को सौंप कर तुझे तुझ में खोना चाहता हूँ..!!
~~ दिल से बोलो जी राधे राधे ~~
हजारों रात का जागा हूँ अब सोना चाहता हूँ
तुझे मिलके मैं ये पलकें भिगोना चाहता हूँ
बहुत ढूंढा है तुझे खुद में इतना थक गया हूँ
कि खुद को सौंप कर तुझे तुझ में खोना चाहता हूँ..!!
~~ दिल से बोलो जी राधे राधे ~~
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