राधे राधे ॥ आज का भगवद चिन्तन ॥
23-07-2018
अक्सर हम लोगों के जीवन में यह देखा जाता है कि हम सब को आंतरिक शांति तो चाहिए लेकिन हमारे सारे प्रयास बाहर की तरफ ही होते हैं। ये तो ठीक ऐसा ही हुआ जैसे अंधेरा घर के भीतर है और हम घर की देहरी से बाहर दीप जलाकर उस अंधेरे से लड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रयास में कोई कमी भी नहीं है, भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। मगर बावजूद इसके अंधेरा है कि टस से मस होने का नाम नहीं ले रहा है। प्रयास पूरा है केवल दिशा गलत है।
*मन किसका है - हमारा स्वयं का।*
*इसे भटका कौन रहा है - हम स्वयं ही।*
*अशांत किसने किया - हमने स्वयं ने।*
*तो अब इसे शांत कौन करेगा - हम ही स्वयं करेंगे।इसमें किसी और का कुछ भी लेना - देना नहीं है।*
भीतरी शांति के प्रयास के लिए बाहरी दौड़ तनिक भी बुद्धिमत्ता नहीं, उसके लिए भीतर ही प्रयास करो! समय लग सकता है मगर बदलाव अवश्य आयेगा।
shayam sunder
23-07-2018
अक्सर हम लोगों के जीवन में यह देखा जाता है कि हम सब को आंतरिक शांति तो चाहिए लेकिन हमारे सारे प्रयास बाहर की तरफ ही होते हैं। ये तो ठीक ऐसा ही हुआ जैसे अंधेरा घर के भीतर है और हम घर की देहरी से बाहर दीप जलाकर उस अंधेरे से लड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रयास में कोई कमी भी नहीं है, भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। मगर बावजूद इसके अंधेरा है कि टस से मस होने का नाम नहीं ले रहा है। प्रयास पूरा है केवल दिशा गलत है।
*मन किसका है - हमारा स्वयं का।*
*इसे भटका कौन रहा है - हम स्वयं ही।*
*अशांत किसने किया - हमने स्वयं ने।*
*तो अब इसे शांत कौन करेगा - हम ही स्वयं करेंगे।इसमें किसी और का कुछ भी लेना - देना नहीं है।*
भीतरी शांति के प्रयास के लिए बाहरी दौड़ तनिक भी बुद्धिमत्ता नहीं, उसके लिए भीतर ही प्रयास करो! समय लग सकता है मगर बदलाव अवश्य आयेगा।
shayam sunder
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