एकादशी -स्पेशल ! 🙏🌹
जो मिलता न हो, जिसे पाया न हो
फिर भी मन में समाये,वोही" कृष्ण" है।
ज्ञान 'गीता' का जिसने दिया विश्व को,
हार ग्वालों से जाए वो ही "कृष्ण "है।
दीन दुखियों की सुनकर जरा सी पुकार
खुद चला आए जो, वो ही "कृष्ण "है।
भोग छप्पन लगें जिनकी सेवा में नित,
फिर भी 'तंदुल'ही खाए वो ही "कृष्ण "है।
घर में नदियाँ बहें घी, दहि, दूध की,
फिर भी माखन चुराए वो ही "कृष्ण "है।
गुण तो सबको ही अपना बना लेते हैं,
जिसको औगुन भी भाए वो ही "कृष्ण "है।
जिसको ठोकर मिली हो इस संसार में
उसको दिल से लगाए वो ही "कृष्ण "है।
अधम से अधम को भी ऊँचा करे
अपने संग में बैठाए, वो ही "कृष्ण "है।
यूँ तो मतलब की यारी निभाते हैं सब
बिना मतलब निभाए वो ही "कृष्ण "है।
और' मेरी' बातों में आँखो में मन में रहे
जो मुझे खुद से मिलाए, वो ही "कृष्ण "है।
जो मिलता न हो, जिसे पाया न हो
फिर भी मन में समाये,वोही" कृष्ण" है।
ज्ञान 'गीता' का जिसने दिया विश्व को,
हार ग्वालों से जाए वो ही "कृष्ण "है।
दीन दुखियों की सुनकर जरा सी पुकार
खुद चला आए जो, वो ही "कृष्ण "है।
भोग छप्पन लगें जिनकी सेवा में नित,
फिर भी 'तंदुल'ही खाए वो ही "कृष्ण "है।
घर में नदियाँ बहें घी, दहि, दूध की,
फिर भी माखन चुराए वो ही "कृष्ण "है।
गुण तो सबको ही अपना बना लेते हैं,
जिसको औगुन भी भाए वो ही "कृष्ण "है।
जिसको ठोकर मिली हो इस संसार में
उसको दिल से लगाए वो ही "कृष्ण "है।
अधम से अधम को भी ऊँचा करे
अपने संग में बैठाए, वो ही "कृष्ण "है।
यूँ तो मतलब की यारी निभाते हैं सब
बिना मतलब निभाए वो ही "कृष्ण "है।
और' मेरी' बातों में आँखो में मन में रहे
जो मुझे खुद से मिलाए, वो ही "कृष्ण "है।

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