*पुनरपि जननं पुनरपि मरणं,*
*पुनरपि जननी जठरे शयनम्।*
*इह संसारे बहुदुस्तारे,*
*कृपयाऽपारे पाहि मुरारे*
*भजगोविन्दं भजगोविन्दं,*
*गोविन्दं भजमूढमते।*
*नामस्मरणादन्यमुपायं,*
*नहि पश्यामो भवतरणे ॥३३॥*
भावार्थ
बार-बार जन्म, बार-बार मृत्यु, बार-बार माँ के गर्भ में शयन, इस संसार से पार जा पाना बहुत कठिन है, हे कृष्ण कृपा करके रक्षा करो ॥
गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो ।
क्योंकि भगवान के नाम जप के अतिरिक्त इस भव-सागर से पार जाने का अन्य कोई मार्ग नहीं है
*पुनरपि जननी जठरे शयनम्।*
*इह संसारे बहुदुस्तारे,*
*कृपयाऽपारे पाहि मुरारे*
*भजगोविन्दं भजगोविन्दं,*
*गोविन्दं भजमूढमते।*
*नामस्मरणादन्यमुपायं,*
*नहि पश्यामो भवतरणे ॥३३॥*
भावार्थ
बार-बार जन्म, बार-बार मृत्यु, बार-बार माँ के गर्भ में शयन, इस संसार से पार जा पाना बहुत कठिन है, हे कृष्ण कृपा करके रक्षा करो ॥
गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो ।
क्योंकि भगवान के नाम जप के अतिरिक्त इस भव-सागर से पार जाने का अन्य कोई मार्ग नहीं है

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