*श्री कृष्ण...
*भगवान की प्रतिज्ञा भक्त के प्रति...
मेरे मार्ग पर पैर रखकर तो देख,
तेरे सब मार्ग न खोल दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए खर्च करके तो देख,
कुबेर के भंडार न खोल दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए कड़वे वचन सुनकर तो देख,
कृपा न बरसे तो कहना ।।
मेरी तरफ आ के तो देख,
तेरा ध्यान न रखूं तो कहना ।।
मेरी बातें लोगों से करके तो देख ,
तुझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना ।।
मेरे चरित्रों का मनन करने तो देख ,
ज्ञान के मोती तुझमे न भर दूँ तो कहना ।।
मुझे अपना मददगार बना कर तो देख ,
तुम्हें सबकी गुलामी से न छुड़ा दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए आँसू बहा के तो देख तेरे जीवन
में आनंद के सागर न बहा दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए कुछ बन के तो देख ,
तुझे कीमती न बना दूँ तो कहना ।।
स्वयं को न्यौछावर करके तो देख ,
तुझे मशहूर न करा दूँ तो कहना ।।
मेरे कीर्तन करके तो देख ,
जगत का विस्मरण न करा दूँ तो कहना ।।
तु मेरा बनकर तो देख ,
हर एक को तेरा न बना दूँ तो कहना ।।
शरणागति जब लेत है, करत त्रिविध दुःख दूर ।
*शोक मोह ते काढि के, देत आनंद भरपूर ॥
यश ही फेल्यो जगत में, अधम उद्धारण आय ।
तिनकी विनती करत हो,.चरन कमल चित लाय ॥
*जय श्री कृष्ण...
*भगवान की प्रतिज्ञा भक्त के प्रति...
मेरे मार्ग पर पैर रखकर तो देख,
तेरे सब मार्ग न खोल दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए खर्च करके तो देख,
कुबेर के भंडार न खोल दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए कड़वे वचन सुनकर तो देख,
कृपा न बरसे तो कहना ।।
मेरी तरफ आ के तो देख,
तेरा ध्यान न रखूं तो कहना ।।
मेरी बातें लोगों से करके तो देख ,
तुझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना ।।
मेरे चरित्रों का मनन करने तो देख ,
ज्ञान के मोती तुझमे न भर दूँ तो कहना ।।
मुझे अपना मददगार बना कर तो देख ,
तुम्हें सबकी गुलामी से न छुड़ा दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए आँसू बहा के तो देख तेरे जीवन
में आनंद के सागर न बहा दूँ तो कहना ।।
मेरे लिए कुछ बन के तो देख ,
तुझे कीमती न बना दूँ तो कहना ।।
स्वयं को न्यौछावर करके तो देख ,
तुझे मशहूर न करा दूँ तो कहना ।।
मेरे कीर्तन करके तो देख ,
जगत का विस्मरण न करा दूँ तो कहना ।।
तु मेरा बनकर तो देख ,
हर एक को तेरा न बना दूँ तो कहना ।।
शरणागति जब लेत है, करत त्रिविध दुःख दूर ।
*शोक मोह ते काढि के, देत आनंद भरपूर ॥
यश ही फेल्यो जगत में, अधम उद्धारण आय ।
तिनकी विनती करत हो,.चरन कमल चित लाय ॥
*जय श्री कृष्ण...

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