Thursday, August 16, 2018

*कृष्ण भक्ति में माया का प्रभाव

*कृष्ण भक्ति में माया का प्रभाव*


यद्यपि माया भगवान का ही एक दासी स्वरुप है लेकिन सबसे बड़ी बाधा भक्ति में यही उत्पन्न करती है।

जब हम कृष्ण भक्ति करने के लिए उत्सुक होते हैं तब माया हमें ऐसा प्रलोभन देती है जैसे मानो लगता है कि यह भी हम एक तरह से भक्ती कर रहे हैं और इस संसार में रहकर हम दुविधा में पड़कर भक्ति ना करते कुछ और ही करने लगते हैं।

प्रायः देखा जाता है कि एक भक्त जब थोड़े दिनों के भक्ति के बाद उसे लगता है कि मुझे कुछ जनसेवा अथवा अन्य किसी भी प्रकार की सेवा करनी चाहिए क्योंकि यह भी एक तरह से भक्ति ही है और इस प्रकार वह माया के चक्कर में आकर भक्ति को छोड़कर अन्य
-अन्य कार्यों में लग जाता है।

इस तरह से वह एक और जन्म, जन्म मृत्यु जरा व्याधि में पड़कर गवा देता है इसलिए हमें इस माया के प्रलोभन से बचना चाहिए और प्रभुपाद जी द्वारा बताए गए निर्देशों का; 4 नियम का पालन अर्थात नशा नहीं करना मांसाहार नहीं करना पर स्त्री संबंध नहीं रखना और जुआ नहीं खेलना इन 4 नियमों के पालन के पश्चात हमें माला यानी महामंत्र का नियमपूर्वक बिना अपराध के जपना।

इन सबके बावजूद भी हमें उन भक्तों का संग करना जो की कृष्ण भक्ति में बड़े चढ़े हैं और उनके संग में हम अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगे अन्यथा माया जैसे ही अकेले हमें पायेगी वह अपना कोई ना कोई रूप पकड़कर हमें भ्रमित कर देगी।

 महाराज भरत के उदाहरण से हम समझ सकते हैं कि इतने बड़े त्यागी होकर वन में तपस्या करते हुए उन्हें माया ने जकड़ लिया और वह माया के चक्रव्यूह में फंस कर दो अन्य जन्म लेने के लिए बाध्य हो गए।
 इस प्रकार हमें नियमपूर्वक भक्तों का संग करना चाहिए क्योंकि जैसे ही हम अकेले होंगे माया अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देगी और कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर और यह मन हमें अन्य अन्य कार्यों में लगा कर भक्ति से कोसों दूर कर देगा।

 याद रहे इस जीवन में हमारा एक ही लक्ष्य होना चाहिए भगवत्प्राप्ति क्योंकि हमने करोड़ों-करोड़ों जन्म इंद्रिय तृप्ति और भोंगो में गंवा दिया है कम से कम इस जन्म को व्यर्थ ना जाने दे।

*हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम* *राम राम हरे हरे*

इस महामंत्र का जप कर हम इस भवसागर से और इस दुखालय से सदैव सदैव के लिए भगवत्प्राप्ति को हम प्राप्त हो जाएंगे।

हरे कृष्ण, हरे रा

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